तजि के सरवारथसिद्धि विमान, सुभान के आनि आनन्द बढ़ाये | जगमात सुव्रति के नन्दन होय, भवोदधि डूबत जंतु कढ़ाये || जिनके गुन नामहिं प्रकाश है, दासनि को शिवस्वर्ग मँढ़ाये | तिनके पद पूजन हेत त्रिबार, सुथापतु हौं इहं फूल चढ़ाये || ॐ ह्रीं श्रीधर्मनाथजिनेन्द्र ! अत्र अवतर अवतर संवौषट् | ॐ ह्रीं श्रीधर्मनाथजिनेन्द्र ! अत्र तिष्ठ तिष्ठ ठः ठः | ॐ ह्रीं श्रीधर्मनाथजिनेन्द्र ! अत्र मम सन्निहितो भव भव वषट् | मुनि मन सम शुचि शीर नीर अति, मलय मेलि भरि झारी | जनमजरामृत ताप हरन को, चरचौं चरन तुम्हारी || परमधरम-शम-रमन धरम-जिन, अशरन शरन निहारी | पूजौं...
Jinvaani path, pooja & stotra