विमल नृप विमला सुअन, श्रेयांसनाथ जिनन्द | सिंहपुर जन्मे सकल हरि, पूजि धरि आनन्द || भव बंध ध्वंसनिहेत लखि मैं शरन आयो येव | थापौं चरन जुग उरकमल में, जजनकारन देव |1| ॐ ह्रीं श्रीश्रेयांसनाथजिनेन्द्र ! अत्र अवतर अवतर संवौषट् | ॐ ह्रीं श्रीश्रेयांसनाथजिनेन्द्र ! अत्र तिष्ठ तिष्ठ ठः ठः | ॐ ह्रीं श्रीश्रेयांसनाथजिनेन्द्र ! अत्र मम सन्निहितो भव भव वषट् | कलधौत वरन उतंग हिमगिरि पदम द्रह तें आवई | सुरसरित प्रासुक उदक सों भरि भृंग धार चढ़ावई || श्रेयांसनाथ जिनन्द त्रिभुवन वन्द आनन्दकन्द हैं | दुखदंद फंद निकंद पूरन चन्द जोतिअमंद हैं || ॐ ह्रीं श्रीश्...
Jinvaani path, pooja & stotra