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श्री श्रेयांसनाथ जी जिन पूजा - Shree Shreyanshnaath ji jin pooja

विमल नृप विमला सुअन, श्रेयांसनाथ जिनन्द | सिंहपुर जन्मे सकल हरि, पूजि धरि आनन्द || भव बंध ध्वंसनिहेत लखि मैं शरन आयो येव | थापौं चरन जुग उरकमल में, जजनकारन देव |1| ॐ ह्रीं श्रीश्रेयांसनाथजिनेन्द्र ! अत्र अवतर अवतर संवौषट् | ॐ ह्रीं श्रीश्रेयांसनाथजिनेन्द्र ! अत्र तिष्ठ तिष्ठ ठः ठः | ॐ ह्रीं श्रीश्रेयांसनाथजिनेन्द्र ! अत्र मम सन्निहितो भव भव वषट् | कलधौत वरन उतंग हिमगिरि पदम द्रह तें आवई | सुरसरित प्रासुक उदक सों भरि भृंग धार चढ़ावई || श्रेयांसनाथ जिनन्द त्रिभुवन वन्द आनन्दकन्द हैं | दुखदंद फंद निकंद पूरन चन्द जोतिअमंद हैं || ॐ ह्रीं श्रीश्...

चालीसा : श्री श्रेयांसनाथ जी | Shreyansnath Chalisa

निज मन में करके स्थापित, पंच परम परमेष्ठी को । लिखूं श्रेयांसनाथ चालीसा, मन में बहुत ही हर्षित हो ।। जय श्रेयांसनाथ श्रुत ज्ञायक हो, जय उत्तम आश्रय दायक हो । माँ वेणु पिता विष्णु प्यारे, तुम सिंहपुर में अवतारे ।। जय ज्येष्ठ कृष्ण षष्ठी प्यारी, शुभ रत्न वृष्टि होती भारी। जय गर्भकल्यानोत्सव अपार, सब देव करें नाना प्रकार ।। जय जन्म जयंती प्रभु महान, फाल्गुन एकादशी कृष्ण जान । जय जिनवर का जन्माभिषेक, शत अष्ट कलश से करे नेक ।। शुभ नाम मिला श्रेयांसनाथ, जय सत्य परायण सद्यजात । निश्रेयस मार्ग के दर्शायक, जन्मे मति श्रुत अवधि धारक...

आरती श्रेयांशनाथ || Aarti Shreyanshnath Ji

प्रभु श्रेयांस की आरती कीजे, भव भव के पातक हर लीजे प्रभु श्रेयांस की आरती कीजे, भव भव के पातक हर लीजे २ स्वर्ण वर्णमय प्रभा निराली, मूर्ति तुम्हारी हैं मनहारी २ सिंहपूरी में जब तुम जन्मे, सुरगण जन्म कल्याणक करते 2 प्रभु श्रेयांस की आरती कीजे, भव भव के पातक हर लीजे विष्णु मित्र पितु, मात नन्दा, नगरी में भी आनन्द छाता २ फागुन वदि ग्यारस शुभ तिथि थी, जब प्रभु वर ने दीक्षा ली थी २ प्रभु श्रेयांस की आरती कीजे, भव भव के पातक हर लीजे माघ कृष्ण मावस को स्वामी,कहलाये थे केवलज्ञानी २ श्रावण सुदी पुरिम आई, यम जीता शिव पदवी पाई श्रेय मार्ग के दाता तुम हो, जजे चन्दनामति शिवगति दो 2 प्रभु श्रेयांस की आरती कीजे, भव भव के पातक हर लीजे प्रभु श्रेयांस की आरती कीजे, भव भव के पातक हर लीजे प्रभु श्रेयांस की आरती कीजे, भव भव के पातक हर लीजे २