सहस्रार दिवि त्यागि, नगर कम्पिला जनम लिय | कृतधर्मानृपनन्द, मातु जयसेना धर्मप्रिय || तीन लोक वर नन्द, विमल जिन विमल विमलकर | थापौं चरन सरोज, जजन के हेतु भाव धर || ॐ ह्रीं श्रीविमलनाथजिनेन्द्र ! अत्र अवतर अवतर संवौषट् | ॐ ह्रीं श्रीविमलनाथजिनेन्द्र ! अत्र तिष्ठ तिष्ठ ठः ठः | ॐ ह्रीं श्रीविमलनाथजिनेन्द्र ! अत्र मम सन्निहितो भव भव वषट् | सोरठाः- कंचन झारी धारि, पदमद्रह को नीर ले | तृषा रोग निरवारि, विमल विमलगुन पूजिये || ॐ ह्रीं श्रीविमलनाथजिनेन्द्राय जन्मजरामृत्युविनाशनाय जलं नि0स्वाहा |1| मलयागर करपूर...
Jinvaani path, pooja & stotra