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श्री विमलनाथ जी जिन पूजा - Shree Vimalnath ji jin pooja

सहस्रार दिवि त्यागि, नगर कम्पिला जनम लिय | कृतधर्मानृपनन्द,   मातु   जयसेना   धर्मप्रिय || तीन लोक वर नन्द, विमल  जिन विमल विमलकर | थापौं चरन सरोज, जजन के हेतु भाव धर || ॐ ह्रीं श्रीविमलनाथजिनेन्द्र ! अत्र अवतर अवतर संवौषट् | ॐ ह्रीं श्रीविमलनाथजिनेन्द्र ! अत्र तिष्ठ तिष्ठ ठः ठः | ॐ ह्रीं श्रीविमलनाथजिनेन्द्र ! अत्र मम सन्निहितो भव भव वषट् | सोरठाः-  कंचन झारी धारि, पदमद्रह को नीर ले |          तृषा रोग निरवारि, विमल विमलगुन पूजिये || ॐ ह्रीं श्रीविमलनाथजिनेन्द्राय जन्मजरामृत्युविनाशनाय जलं नि0स्वाहा |1| मलयागर करपूर...

चालीसा : श्री विमलनाथ जी | Shri Vimalnath Ji Chalisa

सिद्ध अनंतानंत नमन कर, सरस्वती को मन में ध्याय । विमल प्रभु की विमल भक्ति कर, चरण कमल को शीश नवाय ।। जय श्री विमलनाथ विमलेश, आठो कर्म किये निःशेष । कृत वर्मा के राज दुलारे, रानी जयश्यामा के प्यारे ।। मंगलिक शुभ सपने सारे, जगजननी ने देखे न्यारे । शुक्ल चतुर्थी माघ मास की, जन्म जयंती विमलनाथ की ।। जन्मोत्सव देवों ने मनाया, विमलप्रभु शुभ नाम धराया । मेरु पर अभिषेक कराया, गंधोदक श्रद्धा से लगाया ।। वस्त्राभूषण दिव्य पहनाकर, मात पिता को सौपा आकर । साठ लाख वर्षायु प्रभु की, अवगाहना थी साठ धनुष की ।। कंचन जैसी छवि प...

आरती विमलनाथ जी || Aarti Vimalnath JI

आरती करो रे, आरती करो रे । आरती करो रे, आरती करो रे ॥ तेरहवे जिनवर विमलनाथ की आरती करो रे, आरती करो रे । कृतवर्मा पितु राजदुलारे, जयश्यामा के प्यारे । कम्पिल पूरी में जनम लिया हैं, सुर नर वन्दे सारें २ ॥ आरती करो रे० निर्मल त्रय ज्ञान सहित, स्वामी की आरती करो रे आरती करो रे० शुभ ज्येष्ठ वदि दशमी प्रभु की गर्भागम तिथि मानी जाती है जन्म और दीक्षा कल्याणक, माघ चतुर्थी सुदी आती २ आरती करो रे० मनः पर्याय ज्ञानी तीर्थंकर की, आरती करो रे । आरती करो रे० सित माघ छट को ज्ञान हुआ, धनपति शुभ समवशरण रचता । दिव्य ध्वनि प्रभु की खिरी और, भव्यो का नाम कुमुद खिलता 2 । आरती करो रे० केवल ज्ञानी अर्हन्त प्रभु की आरती करो रे० आषाढ़ वदि दशमी तिथि थी, पंचम गति प्रभुवर ने पायी । शुभ लोक शिखर पर राजे जा, परमातम ज्योति प्रगटाई २। आरती करो रे० उन सिद्धप्रिया के अधिनायक की आरती करो रे० हे विमल प्रभु तव चरणों में बस एक आशा हे यह मेरी । मन विमल मति हो जावे प्रभु, मिल जाए मुझे भी सिद्ध गति २ ॥...