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Showing posts with the label भजन-Bhajan

अमृत से गगरी भरो, कि न्हवन प्रभु आज करेंगे... || Amrit se gagri bharo , ki navan prabhu ka aaj karenge

(तर्ज - महलो का राजा मिला, के रानी बेटी राज करेगी...) अमृत से गगरी भरो, कि न्हवन प्रभु आज करेंगे। खुशी-खुशी मिल के चलो, कि न्हवन प्रभु आज करेंगे। टेक॥ सब साथी मिल कलश सजाओ, मङ्गलकारी गीत सुनाओ; मन में आनन्द भयो, कि न्हवन प्रभु आज करेंगे ।।१।। अमृत... इन्द्र इन्द्राणी मिल हर्ष मनावें, प्रभु-चरणों में शीश झुकावें; प्रभुजी की छवि निरखो, कि न्हवन प्रभु आज करेंगे ॥२ ।। अमृत... सुवर्ण कलश प्रभु उदकनि धारा, अङ्गे न्हावे जिनवर प्यारा; स्वामी जगत को खरो, कि न्हवन प्रभु आज करेंगे ॥३॥ अमृत... हे सुखकारी सब दु:खहारी, सेवा जिनकी प्यारी-प्यारी; लेकर ‘सरस’ को चलो, कि न्हवन प्रभु आज करेंगे ॥४॥ अमृत... अन्य प्यारे भजन /Read more Bhajans See More >>

स्वर्ग से सुंदर अनुपम है ये जिनवर का दरबार...| Swarg se sundar anupam hai ye jinvar ka darbaar

(तर्ज - स्वर्ग से सुन्दर सपनो से प्यारा, है अपना घर द्वार...) स्वर्ग से सुंदर अनुपम है ये जिनवर का दरबार। श्रद्धा से जो ध्याता निश्चित हो जाता भव पार, यही श्रद्धान हमारा, नमन हो तुम्हें हमारा ।।टेक।। कभी न टूटे श्रद्धा, तुम पर भगवान हमारी। झुक जाएंगी जीवन, में प्रतिकूलता सारी।। है विश्वास हमारा, इक दिन छूटेगा संसार।। यही श्रद्धान…।।1।। निर्वान्छक है भगवन, ये आराधना हमारी। होवे दशा हमारी, बस जैसी हुई तुम्हारी।। रत्नत्रय का मार्ग चलेंगे, पाएँ मुक्तिद्वार।। यही श्रद्धान…।।2।। स्याद्वाद वाणी ही, भ्रम का अज्ञान मिटाए। निज गुण पर्यायें ही, अपना परिवार बतायें।। ना भूलेंगे मुनिराजो का यह अनंत उपकार।। यही श्रद्धान…।।3।। लोकालोक झलकते, कैवल्यज्ञान है पाया। फिर भी शुद्धातम ही, बस उपादेय बतलाया।। मानो आज मिला मुझको, ये द्वादशांग का सार।। यही श्रद्धान…।।4।। अन्य प्यारे भजन /Read more Bhajans See More >>

जीवन के किसी भी पल में वैराग्य उमड सकता है..|| Jeevan ke kisi bhi pal me vairag umadh sakta hai

तर्ज - ऐ मेरे वतन के लोगो जीवन के किसी भी पल में वैराग्य उमड सकता है संसार में रहकर प्राणी, संसार को तज सकता है ॥ कहीं दर्पण देख विरक्ति, कहीं मृतक देख वैरागी, बिन कारण दीक्षा लेता, वो पूर्व जन्म का त्यागी, निर्ग्रन्थ साधु ही इतने, सदगुण से सज सकता है ॥१॥ आत्मा तो अजर अमर है, हम आयु गिनें इस तन की, वैसा ही जीवन बनता, जैसी धारा चिंतन की, जो पर को समझ पाया है, वह खुद को समझ सकता है ॥२॥ शास्त्रों में सुने थे जैसे, देखे वैसे ही मुनिवर, तेजस्वी परम तपस्वी, उपकारी मेरे गुरुवर , इनकी मृदु वाणी सुनकर, हर प्राणी सुधर सकता है ॥३॥ अन्य प्यारे भजन /Read more Bhajans See More >>

जैन धर्म के हीरे मोती || Jain Dharma ke heere moti ..

जैन धर्म के हीरे मोती, मैं बिखराऊं गली गली। ले लो रे कोइ प्रभु का प्यारा, शोर मचाऊं गली गली। दौलत की दीवानों सुन लो, एक दिन ऐसा आयेगा। धन दौलत और माल खजाना, पडा यहीं रह जायेगा। सुन्दर काया मिट्टी होगी, चर्चा होगी गली गली ॥ ले लो रे... क्यों करता तू तेरी मेरी, तज दे उस अभिमान को। झूंठे झगडे छोड के प्राणी, भज ले तू भगवान को। जग का मेला दो दिन का, अंत में होगी चला चली॥ ले लो रे... जिन जिन ने ये मोती लूटे, वे ही माला माल हुए। दौलत के जो बने पुजारी, आखिर में कंगाल हुए। सोने चांदी वालों सुन लो, बात कहूं मैं भली भली॥ ले लो रे... जीवन में दुख है तब तक ही, जब तक सम्यकज्ञान नहीं। ईश्वर को जो भूल गया, वह सच्चा इंसान नहीं। दो दिन को ये चमन खिला है, फ़िर मुर्झाये कली कली॥ ले लो रे... जैन धर्म के हीरे मोती, मैं बिखराऊं गली गली। ले लो रे कोइ प्रभु का प्यारा, शोर मचाऊं गली गली। अन्य प्यारे भजन /Read more Bhajans See More >>

प्रथमं मंगलम मंत्र नवकार, इसके जपने से होता है भव पार | Pratham Mangalam mantra Navkaar

तर्ज - भर दो झोली मेंरी... प्रथमं मंगलम मंत्र नवकार, इसके जपने से होता है भव पार। पांच पदों के पैतीस अक्षर, भव-भव के काँटे चक्कर ... इसमें गर्भित है सारा आगमसर, इसके जपने से होता है भव पार। प्रथमं मंगलम मंत्र नवकार, इसके जपने से होता है भव पार। अरिहंत सिद्ध आचार्य उपाध्याय, सर्व साधु को मेरा नमन। गुण समूह है ये एक सो आठ, अष्ट कर्मो को देते ये काट। गुण सुमिरन करें हम भी जरा सा, जिनागम का है सार भरा सा... पीले ये प्याला हम भी तो जरा सा, जपते जपते ही निकले मेरे प्राण। वीर प्रभु से हम मांगे ये वरदान। प्रथमं मंगलम मंत्र नवकार, इसके जपने से होता है भव पार। चंदना को भी तारा है सीता को भी, कुष्टी श्रीपाल की काया थी खिली। तिरे सेठ सुदर्शन सोमासती, अर्जुनमाली और अंजनासती ... हां कभी न कभी तिरे नैय्या मेरी, ध्याते ध्याते ही निकले मेरे प्राण। वीर प्रभु से हम मांगे ये वरदान। प्रथमं मंगलम मंत्र नवकार, इसके जपने से होता है भव पार। पांच पदों के पैतीस अक्षर, भव-भव के काँटे चक्कर ... इसमें गर्भित है सारा आगमसर, इसके जपने से होता है भव पार। अन्य प्यारे भजन /Read more Bhajans ...

गुरु ने जहां जहां भी ज्योति जलाई है

गुरु ने जहाँ-जहाँ भी ज्योति जलाई है। काले-काले बादलों पर रोशनी सी छाई है। विद्यासागर गुरुदेव... विद्यासागर गुरुदेव... तन मन में वैराग्य जिनके समाया है। शाश्वत सुख पाने छोड़ी जग माया है। निर्मोही गुरुवर पे दुनिया रिसाई है। गुरु के सिवा हर चीज पराई है। विद्यासागर गुरुदेव... विद्यासागर गुरुदेव... अखियों को खोल जरा ज्ञान के उजाले में रख विश्वास पूरा जग रखवाले में । कितनी ही बार मैंने खुद को समझाई है। गुरु के सिवा हर चीज पराई है। विद्यासागर गुरुदेव... विद्यासागर गुरुदेव... संकटों से भरा गुरु मुक्ति पथ हमारा है। बीच भवर मैं नैया तेरा ही सहारा है। हँसी खुशी आगे बढ़ो गुरु ने सिखाई है। गुरु के सिवा हर चीज पराई है। विद्यासागर गुरुदेव... विद्यासागर गुरुदेव... अन्य प्यारे भजन /Read more Bhajans See More >>

जिया कब तक उलझेगा संसार में | Jiya kab tak uljhega

जिया कब तक उलझेगा संसार विजल्पों में। कितने भव बीत चुके संकल्प-विकल्पों में।।टेक॥ उड़-उड़ कर यह चेतन गति-गति में जाता है। रागों में लिप्त सदा भव-भव दुःख पाता है।। पल भर को भी न कभी निज आतम ध्याता है। निज तो न सुहाता है पर ही मन भाता है।। यह जीवन बीत रहा झूठे संकल्पों में। जिया कब तक उलझेगा संसार विजल्पों में ॥1जिया.॥ निज आत्मस्वरूप तो लख तत्त्वों का कर निर्णय । मिथ्यात्व छूट जाए समकित प्रगटे निजमय ।। निज परिणति रमण करे हो निश्चय रत्नत्रय । निर्वाण मिले निश्चित छूटे यह भवदुःखमय ।। सुख ज्ञान अनंत मिले चिन्मय की गल्पों में। जिया कब तक उलझेगा संसार विजल्पों में ।।2जिया.॥ शुभ-अशुभ विभाव तजे हैं हेय अरे आस्रव । संवर का साधन ले चेतन का कर अनुभव ।। शुद्धात्म का चिन्तन आनंद अतुल अनुभव । कर्मों की पगध्वनि का मिट जायेगा कलरव ।। तू सिद्ध स्वयं होगा पुरुषार्थ स्वकल्पों में। जिया कब तक उलझेगा संसार विजल्पों में ।।3जिया.॥ तू कौन कहाँ का है अरु क्या है नाँव अरे । आया है किस घर से जाना किस गाँव अरे ।। सोचा न कभी तूने होकर निज छाँव अरे । यह तन तो पुद्गल है दो दिन का ठाँव अरे।। तू चेतन द्रव्य सबल ले सुख ...

भगवान मेरी नैया उस पार लगा देना || BHAGWAN MERI NAIYA US PAAR LAGA DENA

भगवान मेरी नैया, उस पार लगा देना अब तक तोह निभाया है, आगे भी निभा देना हम दिन दुखी निर्धन, नित नाम जपे प्रतिपल यह सोच दरस दोगे, प्रभु आज नहीं तो कल जो बाग़ लगाया है फूलो से सजा देना अब तक तोह निभाया… तुम शांति सुधाकर हो, तुम ज्ञान दिवाकर हो मुम हँस चुगे मोती, तुम मानसरोवर हो दो बूंद सुधा रूस की, हम को भी पिला देना अब तक तोह निभाया… रोकोगे भला कब तक, दर्शन दो मुझे तुम से चरणों से लिपट जाऊं प्रभु शोक लता जैसे अब द्वार खड़ा तेरे , मुझे रह दिखा देना अब तक तोह निभाया है… मझदार पड़ी नैया डगमग डोले भव में आओ त्रिशाला नंदन हम धयान धरे मन में अब दस करे विनती, मुझे अपना बना लेना भगवान मेरी नैया उस पार लगा देना अब तक तोह निभाया है आगे भी निभा देना ------------------------------------------------------------------------ भगवान मेरी नैया उस पार लगा देना । अब तक तो निभाया है, आगे भी निभा देना ॥ दल बल के साथ माया, घेरे जो मुझ को आ कर । तुम देखते ना रहना, झट आ के बचा लेना ॥ संभव है झंझटों में मैं तुझ को भूल जाऊं । पर नाथ दया कर के मुझ को ना भुला देना ॥ तुम देव मैं पुजारी, तुम इष्ट...

मैं ज्ञानानंद स्वभावी हूं | Mai gyananand swabhabhi hu

मैं ज्ञानानंद स्वभावी हूं, मैं ज्ञानानंद स्वभावी हूं ॥ मैं हूं अपने में स्वयं पूर्ण, पर की मुझमें कुछ गंध नहीं । मैं अरस, अरूपी, अस्पर्शी, पर से कुछ भी सम्बन्ध नहीं ॥ मैं रंग-राग से भिन्न भेद से, भी मैं भिन्न निराला हूं । मैं हूं अखंड चैतन्य-पिण्ड, निज-रस में रमने वाला हूं ॥ मैं ही मेरा कर्ता-धर्ता, मुझमें पर का कुछ का काम नहीं । मैं मुझमें रमने वाला हूं, पर में मेरा विश्राम नहीं ॥ मैं शुद्ध-बुद्ध अविरुद्ध एक, पर परिणति से अप्रभावी हूं । आत्मानुभूति से प्राप्त तत्त्व, मैं ज्ञानानंद स्वभावी हूँ ॥ अन्य प्यारे भजन /Read more Bhajans See More >>

इक नाम सांचा, इक नाम प्यारा | Ek naam sancha, Ek naam pyara

एक नाम साँचा एक नाम प्यारा, लेले गुरु का अब तू सहारा-2 तेरे चरणों मैं हम सबका नमन हैं, विद्यासागर हैं नाम तिहारा-2 गुरुदेव मेरे गुरुदेव… बजले रे मन भजले….. (1) सभी धर्मो के लोग हैं आते,-2 तेरी महिमा किले सब गुण गाते-2 भक्ति का तूने हैं मार्ग दिखाया मिल जुल कर हैं रहना सिखाया…. एक नाम साँचा … गुरुदेव मेरे गुरुदेव……. (2) धर्म के हैं ये पंथ निराले-2 गुरुवर को तू हृदय मैं बसा ले -2 नाम जपू मैं दिन रात तुम्हारा नाम तुम्हारा हम सब का सहारा….. एक नाम sancha… गुरुदेव मेरे गुरुदेव…….. (3) केसी ये महिमा तुमने दिखाई-2 सच की राह हैं तूने बताई -2 जो भी तेरे शरण मैं हैं आता खाली हाथ कभी भी ना जाता….. एक नाम सांचा… गुरुदेव मेरे गुरुदेव…….. (4) विद्याधर से हुए विद्यासागर -2 रत्नत्रय के तुम हो सागर -2 तेरी वाणी हैं पावन वाणी सुख पाते हैं लाखो प्राणी…….. एक नाम sancha… गुरुदेव मेरे गुरुदेव…….. (5) चरण शरण की शीतल छाया -2 हे परमेश्वर सदा तुम्हे ध्याया -2 पंच महाव्रत धारी तुम्ही हो पंचम युग अवतारी तुम्ही हो…….. एक नाम सांचा… गुरुदेव मेरे गुरुदेव…….. (6) धन्य वो भूमि जहा पर तूने -2 चौमासे का प...

तूने खूब दिया भगवान , तेरा बहुत बड़ा एहसान | Tune khub diya bagwaan ....

मांगते ही रहते तुझसे सांझ सबेरे हाथ ये फेले रहते , सामने तेरे तूने खूब दिया भगवान , तेरा बहुत बड़ा एहसान -2 (1) याद है मुझे वो दिन खाली जेब थी मेरी दर दर भटकता था में -2 गैरों की क्या कहूँ , आपनो की आंखों में रह रह खटकता था में -2 चारो तरफ थे मेरे गम के अन्धेरे आखित में आया बाबा काम तू मेरे-2 तूने खूब दिया भगवान , तेरा बहुत बड़ा एहसान -2 (2) लड़खड़ा गया अगर में , जीवन की राह में तेरा सहारा मिला, तेरा सहारा -2 मुझसे दो कदम आगे किस्मत चली मेरी पाके इशारा तेरा-2 देने को कुछ नही है पास में मेरे दो आँशु चढ़ा देता हूँ , चरणों मे तेरे-2 तूने खूब दिया भगवान , तेरा बहुत बड़ा एहसान -2 (3) मांगना में छोर दूँ , हो नही सकता प्रभु आदत न जाये मेरी आदत न जाये-2 और तुझसे लेने में बच्चो को कभी लाज न आये बाबा, लाज न आये दबा जा रहा हूँ मै तो कर्जे में तेरे अहसान कितने बाबा ,मुझपे है तेरे -2 तूने खूब दिया भगवान , तेरा बहुत बड़ा एहसान -2 (4) लायक नही था में इतने के हे प्रभु , जितना दिया है तुमने -2 सूने से जीवन मे तूने खुशनसीबी का रंग भर दिया है बाबा रंग भर दिया है खाली दर से मुझे तू , अब न लौटना इतना हंसाया ...

केसरिया केसरिया | Kesariya Kesariya

केसरिया, केसरिया, आज हमारो मन केसरिया॥ तन केसरिया, मन केसरिया, पूजा के चावल केसरिया। भक्ति में हम सब केसरिया॥ केसरिया...॥ हम केसरिया, तुम केसरिया, अष्ट द्रव्य सब हैं केसरिया। मंदिर की है ध्वजा केसरिया, भक्ति में हम सब केसरिया॥ केसरिया...॥ इन्द्र केसरिया, इन्द्राणि केसरिया, सिद्धों की पूजन केसरिया। पूजा के सब भाव केसरिया, भक्ति में हम सब केसरिया॥ केसरिया...॥ वीर प्रभु की वाणी केसरिया, अहिंसा परमो धर्म केसरिया। जीयो जीने दो केसरिया, भक्ति में हम सब केसरिया॥ केसरिया...॥ पीछी केसरिया, कमण्डल केसरिया, दिगम्बर साधु भी केसरिया। शत शत वंदन है केसरिया, भक्ति में हम सब केसरिया॥ केसरिया...॥ स्वर्णिम रथ देखो केसरिया, स्वर्ण वरण प्रभुजी केसरिया। छत्र चंवर ध्वज सब केसरिया, भक्ति में हम सब केसरिया॥ केसरिया...॥

तुम से लागी लगन.. पारस प्यारा (Tumse Lagi Lagan Le Lo Apni Sharan Paras Pyara)

श्री पाश्र्वनाथ स्तुति || SHRI PARSHVANATH STUTI कविश्री ‘पंकज’ तुम से लागी लगन, ले लो अपनी शरण, पारस प्यारा, मेटो मेटो जी संकट हमारा । निशदिन तुमको जपूँ, पर से नेह तजूँ, जीवन सारा, तेरे चरणों में बीत हमारा ॥टेक॥ अश्वसेन के राजदुलारे, वामा देवी के सुत प्राण प्यारे। सबसे नेह तोड़ा, जग से मुँह को मोड़ा, संयम धारा ॥ मेटो मेटो जी संकट हमारा ॥ इंद्र और धरणेन्द्र भी आए, देवी पद्मावती मंगल गाए । आशा पूरो सदा, दुःख नहीं पावे कदा, सेवक थारा ॥ मेटो मेटो जी संकट हमारा ॥ जग के दुःख की तो परवाह नहीं है, स्वर्ग सुख की भी चाह नहीं है। मेटो जामन मरण, होवे ऐसा यतन, पारस प्यारा ॥ मेटो मेटो जी संकट हमारा ॥ लाखों बार तुम्हें शीश नवाऊँ, जग के नाथ तुम्हें कैसे पाऊँ । ‘पंकज’ व्याकुल भया, दर्शन बिन ये जिया लागे खारा ॥ मेटो मेटो जी संकट हमारा ॥ तुम से लागी लगन, ले लो अपनी शरण, पारस प्यारा, मेटो मेटो जी संकट हमारा ।

पारस रे तेरी कठिन डगरिया | Paras re teri kadin dagaria

पारस रे तेरी कठिन डगरिया किस विधि मैं तोहे पाऊँ रे साँवरिया कठिन तेरा जिन रूप में आना कठिन तेरे शुभ दर्शन पाना कठिन हटाना श्री मुख से नजरिया पारस रे तेरी कठिन डगरिया सयम नियम कठिन व्रत तेरे, तेरी तरह सुन भगवन मेरे ओढ़ना कठिन ब्रह्मचर्य की चदरिया पारस रे तेरी कठिन डगरिया कठिन महल तज वन में जाना कठिन रात दिन ध्यान लगाना टप अति कठिन, कठिन मुनिचर्या रे जिनवर तेरी कठिन डगरिया कठिन तुझे आहार कारण अंतराय से कठिन बचाना कठिन जिमाना बिन प्याली बिन थरिया पारस रे तेरी कठिन डगरिया कठिन प्रहार कमठ के सह के कठिन उपसर्ग में अवचिल रह के पायी कठिन केवल की उजरिया पारस रे तेरी कठिन डगरिया मोक्ष जहां से गया तू जिनराई उस पर्वत की कठिन चढ़ाई तुही ले चल मेरी थाम के उँगरिया पारस रे तेरी कठिन डगरिया स्वररविन्द्र जैन श्रेणीजैन भजन

जय जिनवाणी माता Jai jinvani mata

जय जिनवाणी माता, रख लाज हमारी, जय जिनवाणी २ आज सभा में मैया तोहे पुकारू २ आज सभा में तोहे पुकारू, जग की भाग्य विधाता ।। रख लाज हमारी, जय जिनवाणी ०० ।। आन के मेरे कंठ विराजो मैया २ आन के मेरे कंठ विराजो, स्वर सरगम की गाथा ।। रख लाज हमारी, जय जिनवाणी ०० ।। शाष्त्र ग्रंथो का बोध नहीं हैं मैया २ शाष्त्र ग्रंथो का बोध नहीं हैं, हमको कुछ नहीं आता ।। रख लाज हमारी, जय जिनवाणी ०० ।। योगेन्द्र सागर तुम्हे पुकारे मैया २ योगेन्द्र सागर तुम्हे पुकारे, तुमको शीश नवाता ।। रख लाज हमारी, जय जिनवाणी ०० ।। जय जिनवाणी माता, रख लाज हमारी । जय जिनवाणी माता ।।

Woh hai Bahubali bagwan

मेरे मन मंदिर में आन | Mere Mann Mandir Mein

मेरे मन मंदिर में आन पधारो महावीर भगवान | भगवन तुम आनंद सरोवर, रूप तुम्हारा महा मनोहर | निश-दिन रहे तुम्हारा ध्यान, पधारो महावीर भगवान ||(1) सुर किन्नर गणधर गुण गाते, योगी तेरा ध्यान लगाते | गाते सब तेरा यशगान, पधारो महावीर भगवान ||(2) जो तेरी शरणागत आया, तूने उसको पार लगाया | तुम हो दयानिधि भगवान, पधारो महावीर भगवान ||(3) भक्त जनों के कष्ट निवारे, आप तरें हमको भी तारें | कीजे हमको आप सामान, पधारो महावीर भगवान ||(4) आये हैं हम शरण तिहारी, भक्ति हो स्वीकार हमारी | तुम हो करुणा दयानिधान, पधारो महावीर भगवान ||(5) रोम रोम पर तेज तुम्हारा, भूमंडल तुमसे उजियारा | रवि-शशि तुमसे ज्योतिर्मान, पधारो महावीर भगवान ||(6) Artist - अज्ञात

चेतो-चेतो आराधना में | Cheto Cheto Aaradhana me

देखो-देखो यह जीव की, विराधना का फल। चेतो-चेतो आराधना में, मत बनो निर्बल ॥टेक।। पाषाण खण्ड कह रहे, कठोरता त्यागो। विनम्र हो उत्साह से, शिवमार्ग में लागो।। बहते हुए झरने कहें, धोओ मिथ्यात्व मल ।।देखो-देखो…॥१॥ ईर्ष्या त्यागो जलती हुई, अग्नि है कह रही। मत चाह दाह में जलो, सुख अन्तर में सही ।। वायु कहे भ्रमना वृथा, होओ निज में निश्चल ।।देखो-देखो…।।२।। जड़ता छोड़ो प्रमाद को नाशो कहें तरुवर । शुद्धातमा ही सार है, उपदेश दें गुरुवर ।। समझो-समझो निजात्मा, अवसर बीते पल-पल ।।देखो-देखो…।।३।। मायाचारी संक्लेशता का, फल कहें तिर्यंच। जागो अब मोह नींद से, छोड़ो झूठे प्रपञ्च।। जिनधर्म पाया भाग्य से, दृष्टि करो निर्मल ।।देखो-देखो…।।४।। श्रृंगार अरु भोगों की रुचि का, फल कहती नारी। कंजूसी पूर्वक संचय का, फल कहते भिखारी ।। बहु आरम्भ परिग्रह फल में, नारकी व्याकुल ।।देखो-देखो… ॥५॥ असहाय शक्ति हीन, देखो दरिद्री रोगी। कोइ इष्ट वियोगी, कोई अनिष्ट संयोगी। घिनावना तन रूप, अंगोपांग है शिथिल ।।देखो-देखो…॥६॥ यदि ये दु:ख इष्ट नहीं हैं, तो निज भाव सुधारो। निव...

नर तन रतन अमोल । Nar Tan Ratan Amol

नर तन रतन अमोल इस पानी में मत डालो,  इस पानी में मत डालो,  तीरथ कर लो पुण्य कमा लो प्रभु जी के गुण गालों चलो सम्मेद शिखर चलो चलो सम्मेद शिखर चलो उतरित चढ़ते पहाड़ न मन इत उत डोले,

आसमान पे उड़ने वाले धरती को पहचान | Aasman ko udne wale dharti ko pehchan

आसमान पे उड़ने वाले धरती को पहचान किसी का रहा नहीं अभिमान --2 आसमान पे उड़ने वाले धरती को पहचान ये संसार सभी नश्वर है फिर कैसा अभिमान छोड़के जगको चलेगए वो जोथे वीरबलवान किसी का रहा नहीं अभिमान --2 आसमान पे उड़ने वाले धरती को पहचान धन दौलत का मान बुरा है कहते वेद पुराण अभिमानी रावण का मिट गया नामोनिशान किसी का रहा नहीं अभिमान --2 आसमान पे उड़ने वाले धरती को पहचान तीरथ मंदिर मंदिर ढूढा दिया न इतना ध्यान हरदिल में भगवान बसा है करले तू पहचान किसी का रहा नहीं अभिमान --2 आसमान पे उड़ने वाले धरती को पहचान सदा यहां नहीं रहना तुझको रहना दिनचार इंसा से क्यों नफरत करता तू भी तो इंसान किसी का रहा नहीं अभिमान --2 आसमान पे उडने बाले धरती को पहचान अबभी समय शरण आजा तजदे अभिमान ये संसार छोड़ कर जाना तेरा हो शमशान किसी का रहा नहीं अभिमान --2 आसमान पे उड़ने वाले धरती को पहचान किसी का रहा नहीं अभिमान --2 अन्य प्यारे भजन /Read more Bhajans See More >>